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अंबेडकर अस्पताल में महज 6 महीनों में ही 1679 कैंसर व 183 ब्रेस्ट कैंसर के नए मामले आए दो सालों में कुल 1 लाख से अधिक मरीज

दामिनी बंजारे

रायपुर । देशभर में 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। जिसका मकसद महिलाओं को स्तनपान के लिए जागरूक कराना है। सभी जानते हैं कि शिशु के लिए माँ का दूध बेहद उपयोगी होता है।

वर्तमान में बदलते परिवेश और दैनिक दिनचर्या की वजह से आज महिलाएं बच्चे को स्तनपान कराने से हिचकती हैं। ये जीवनशैली कहीं न कहीं कई घातक बीमारी को जन्म दे रही है। जिसमें प्रमुख है ब्रेस्ट कैंसर। आज महिलाओं में स्तन कैंसर की शिकायत सबसे अधिक देखी जा रहीं हैं।

बात अगर राजधानी रायपुर की करें तो केवल आंबेडकर अस्पताल में महज 6 महीनों में ही 1679 कैंसर व 183 ब्रेस्ट कैंसर के नए मामले आए हैं। अस्पताल से मिले 1 जनवरी से 31 जुलाई तक के रिकॉर्ड बता रहे हैं कि शहर में महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर की संभावना बढ़ी है। वहीं विगत दो सालों में कुल 1 लाख से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचे। वर्तमान में 3 हजार 286 मरीजों का इलाज अस्पताल में जारी है। वहीं अब तक विभाग द्वारा 48 हजार 220 मरीजों का इलाज किया जा चुका है।

एम्स में आए 200 मरीज

अगर एम्स रायपुर की बात करें तो वर्ष 2020-21 में लगभग 200 ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों का इलाज किया गया। एम्स में पिछले साल लगभग 150 स्तन सर्जरी की गई जिनमें उपचारित रोगियों की न्यूनतम आयु 25 वर्ष थी। वही स्तन कैंसर के अधिकतम मामले 40-50 वर्ष के आयु वर्ग में पाए गए।

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वही विगत वर्षों में यहां देखा गया है कि 35 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में भारी वृद्धि हुई है। जिसके मद्देनजर एम्स लोगों में ब्रेस्ट कैंसर के जागरूकता के लिए पिछले दो सालों से राष्ट्रीय स्तर के शिविरों का आयोजन कर रही हैं।

स्तनपान में पुरुषों और परिवार की जिम्मेदारी“

इस वर्ष भी स्तनपान साप्ताह पर कार्यशाला आयोजन किया गया, इस दौरान कार्यक्रम थीम “स्तनपान में पुरुषों और परिवार की जिम्मेदारी‘‘ है। साप्ताह के दौरान शिशुवती महिलाओं को स्तनपान करवाने में पति को सहयोग करने, घर के कामों में मदद करने के लिए जागरुक किया जा रहा है। जिससे बच्चे को स्तनपान कराने के लिए माँ को ज्यादा समय मिल सके। परिवार के अन्य सदस्यों को भी शिशुवती माता का सहयोग करना चाहिए। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार स्तनपान सप्ताह के तहत किया जाएगा।

स्तनपान ना करवाना स्तन कैंसर का प्रमुख कारण

कैंसर विशेषज्ञ डॉं चौधरी के मुताबिक ज़्यादा उम्र में गर्भवती होना और बच्चों को स्तनपान ना करवाना स्तन कैंसर के प्रमुख कारण हैं। इसलिए ज़रूरी है कि महिलाएं अपने वज़न को नियंत्रित रखें, गर्भधारण का समय निश्चित करें और कम-से-कम 6 महीने तक बच्चों को स्तनपान ज़रूर कराएं। ऐसा करने से स्तन कैंसर का ख़तरा कम हो जाता है। हालांकि स्तन कैंसर का कारण आनुवंशिक भी हो सकता हैं, लेकिन ऐसा सिर्फ़ 5-10 % महिलाओं में ही पाया जाता है।

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महिलाएं इन तरीकों से खुद करें जांच

डॉ. भीमराव आंबेडकर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष व कैंसर विशेषज्ञ डॉ विवेक चौधरी का कहना हैं की “स्तन कैंसर से डरे नहीं क्योंकि इसका निदान संभव है। अगर स्तन कैंसर पहले स्टेज में ही है, तो इसे जड़ से ख़त्म करना बहुत आसान है, यहां यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अलग-अलग महिलाओं में स्तन कैंसर के अलग-अलग लक्षण पाए जाते हैं।

स्तन कैंसर को समझना आसान है, स्त्रियां खुद भी स्तन की जांच कर सकती हैं। स्तन में गांठ, स्तन के निप्पल के आकर या स्किन में बदलाव, स्तन का सख़्त होना, स्तन के निप्पल से रक्त या तरल पदार्थ का आना, स्तन में दर्द, बाहों के नीचे भी गांठ होना स्तन कैंसर के संकेत हैं। हालांकि स्तन में हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इसकी जांच करवाना बेहद ज़रूरी है, ताकि कहीं वो आगे चलकर कैंसर का रूप ना पकड़ ले।

पुरूषों में भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल से मिले आकड़ों के अनुसार 2020 में स्तन कैंसर के 402 मामले आए। वहीं जनवरी से अब तक अस्पताल में 183 केस सामने आए इनमें 11 मामले पुरूषों के थे। जिनका सफलता पूर्वक उपचार किया जा चुका है। यह सुनने में भले ही थोड़ा अजीब है लेकिन, यह सच है कि पुरूषों में भी ब्रेस्ट कैंसर हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर जन्म से ही हर व्यक्ति का एक छोटा ब्रेस्ट टिश्यू होता है। पुरुष एक छोटे से ब्रेस्ट टिश्यू के साथ जन्म लेते हैं, और इससे ही उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा बना रहता है।

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स्टेज के अनुसार की जाती है सर्जरी

जब किसी पुरुष के ब्रेस्ट टिश्यू में कैंसर का विकास होता है तो उसे मेल ब्रेस्ट कैंसर कहा जाता है। यदि शुरूआती स्टेज में मेल ब्रेस्ट कैंसर का पता चल जाए तो इस बीमारी से रिकवर होने के अधिक चांसेस रहते हैं। अमूमन ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में ब्रेस्ट टिश्यू को सर्जरी से हटा दिया जाता है। कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी अन्य ट्रीटमेंट हैं, जो रोगी की बीमारी के स्टेज के अनुसार किए जाते हैं। औसत मामलों में मेल ब्रेस्ट कैंसर उम्रदराज लोगों को होता है लेकिन, इसका मतलब यह नहीं है कि यह किसी भी उम्र में नहीं हो सकता है।

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