Jagdeep Dhankhar Resignation: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफे ने सियासी हलचल मचा दी है। सोमवार को मानसून सत्र की शुरुआत के दिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वजह बताई गई स्वास्थ्य। लेकिन राजनीति में हर कदम यूं ही नहीं उठता। इस फैसले के पीछे क्या वाकई सिर्फ तबीयत है या कुछ और? सवाल कई हैं, अटकलें उससे भी ज्यादा। आइए, तीन बड़ी थ्योरी पर नज़र डालते हैं जिन पर चर्चा जोरों पर है।

1. इस्तीफे की टाइमिंग पर शक क्यों हो रहा है?

धनखड़ के बीमार होने की खबरें पिछले कुछ महीनों से सामने आ रही थीं। मार्च से जुलाई तक अस्पताल जाने की बातें भी हुईं। लेकिन अगर बात सिर्फ स्वास्थ्य की थी, तो सत्र शुरू होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया जाता। फिर ठीक पहले दिन की शाम को ही क्यों?

एक विपक्षी नेता ने कहा, अगर तय था कि इस्तीफा देना है, तो सुबह दे देते। लेकिन ऐसा लग रहा है जैसे कुछ और हुआ, जिसने अचानक फैसला करवाया। वहीं उपराष्ट्रपति सचिवालय ने दोपहर में बयान दिया था कि धनखड़ इसी हफ्ते जयपुर जाने वाले हैं। तय कार्यक्रम के बीच अचानक इस्तीफा और भी सवाल खड़े कर गया।

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2. बिहार चुनाव और नीतीश कुमार का ‘संभावित प्रमोशन’?

बिहार में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। नीतीश कुमार की जेडीयू और बीजेपी साथ हैं, लेकिन हालात स्थिर नहीं। ऐसे में एक थ्योरी ये चल रही है कि जगदीप धनखड़ के हटने से उपराष्ट्रपति की कुर्सी खाली हुई, और बीजेपी इसे नीतीश कुमार को सौंप सकती है।

बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर ने खुलकर कहा कि अगर नीतीश उपराष्ट्रपति बनते हैं, तो बिहार को फायदा होगा।
नीतीश की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, लेकिन बयान ने हवा दे दी है कि क्या ये सब एक बड़े पॉलिटिकल रील-शफल का हिस्सा है?

3. क्या धनखड़ को नजरअंदाज़ किया गया?

राज्यसभा में जिस तरह का घटनाक्रम हुआ, वो भी इस फैसले के पीछे का कारण हो सकता है। मानसून सत्र के पहले ही दिन धनखड़ ने एक ऐसा नोटिस स्वीकार किया, जिसमें 60 से ज्यादा विपक्षी सांसदों ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने की मांग की थी। इसके तुरंत बाद बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की मीटिंग हुई, जिसमें बीजेपी के दो बड़े चेहरे जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू गैरहाजिर रहे।

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बाद में सफाई दी गई कि दोनों व्यस्त थे और उन्होंने धनखड़ को पहले से सूचित कर दिया था। लेकिन कांग्रेस ने इसे अपमान की तरह देखा। एक सीनियर नेता का कहना था, यह संयोग नहीं था, ये एक सिग्नल था।

4. न्यायपालिका से टकराव तो नहीं असली वजह?

धनखड़ बीते महीनों में कई बार सुप्रीम कोर्ट और न्यायपालिका के फैसलों पर सवाल उठाते नजर आए। खासकर नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) को रद्द करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को उन्होंने लोकतंत्र के खिलाफ बताया था। सरकार को इस वजह से कई बार असहजता भी हुई।

कई जानकार मानते हैं कि ये टकराव पार्टी लाइन से थोड़ा बाहर चला गया था। और हो सकता है यही असल वजह हो, जिसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।

तो क्या सिर्फ स्वास्थ्य है वजह?

कागज़ पर वजह स्वास्थ्य है। लेकिन जो दिख रहा है, उससे कहीं ज़्यादा पर्दे के पीछे चल रहा है। संसद के सत्र की पहली ही शाम इस्तीफा, नीतीश का नाम चर्चा में आना, न्यायपालिका को लेकर तीखी बयानबाज़ी और पार्टी के भीतर दूरी ये सब सिर्फ इत्तेफाक नहीं हो सकते।

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राजनीति में समय सबसे बड़ा इशारा करता है। और इस बार समय ने जो कहा है, उसे नजरअंदाज़ करना मुश्किल है।