0 पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा इलाज के लिए फोन करने के बाद मची थी हलचल

सूरजपुर। भाजपा के पूर्व मंडल महामंत्री विशंभर यादव ने शारीरिक और आर्थिक संकट से त्रस्त होकर हाल ही में मुख्यमंत्री से इच्छा मृत्यु की मांग की थी। यह मुद्दा सुर्खियों में आया, जिसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने यादव और उनकी पत्नी से फोन पर बातचीत की थी। उन्होंने उन्हें रायपुर बुलाकर इलाज कराने का आश्वासन दिया था। इस वाकये के बाद सरकार हरकत में आयी है। कल देर शाम महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े और प्रेमनगर विधायक भूलन सिंह मरावी सूरजपुर पहुंचे और विशंभर यादव से मुलाकात की। इसके बाद एंबुलेंस की व्यवस्था कर उन्हें बेहतर उपचार के लिए रायपुर रेफर किया गया। कहा गया है कि स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की देखरेख में अच्छे अस्पताल में उनका इलाज होगा।

विधायक मरावी ने दी ये सफाई

विधायक भूलन सिंह मरावी ने इस दौरान कहा कि यह कहना गलत है कि दो साल से मैं यहां नहीं आया। मैं कई बार विशंभर यादव से मिलने आता रहा हूँ, उनके घर पर चाय भी पीता था। हाँ, बरसात की वजह से कुछ दिन पहले नहीं आ सका। जैसे ही मुझे जानकारी मिली कि उनकी तबीयत बिगड़ गई है, मैं तुरंत यहां पहुंचा। हमारे साथ महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी आईं। हमने विशंभर यादव को अपने परिवार का हिस्सा मानते हुए रायपुर रेफर किया है। अब रायपुर में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की देखरेख में अच्छे अस्पताल में उनका इलाज कराया जाएगा।

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विधायक भूलन सिंह ने कहा कि विशंभर यादव हमारे परिवार जैसे हैं और हम लोग हरसंभव प्रयास करेंगे कि उन्हें बेहतर इलाज मिले और वे जल्द स्वस्थ होकर फिर से अपने लोगों के बीच लौटें।

अब तक इलाज में खर्च हुए 35 लाख रुपये

बता दें कि दो साल पहले साल 2023 में रायपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में जाते समय बस हादसे में विशंभर यादव गंभीर रूप से घायल हो गए और स्थायी रूप से विकलांग हो गए। संगठन की तरफ से अपोलो से एम्स दिल्ली के लिए एयर एंबुलेंस की व्यवस्था भी कराया गया था। लेकिन उसके बाद इनका हाल-चाल लेने वाला कोई नहीं रहा। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार भी बन गई। उसके बाद भी आज वे इलाज के अभाव में बिस्तर में पड़े हुए थे और लगातार दो वर्षों से इनके इलाज का खर्च परिवार उठा रहा है। लेकिन अब उनकी भी स्थिति बिगड़ने लगी है, अब तक इलाज में 30 से 35 लाख रुपए खर्च हो गए हैं। इनके पास जो भी था, वह सब लगा दिए। घर की स्थिति देखते हुए और अपने शारीरिक स्थिति से मजबूर होकर विशंभर यादव ने इच्छा मृत्यु की मांग की। जिसके बाद सरकार ने उनकी सुध ली और अब उनका बेहतर उपचार कराने की बात कही जा रही है।

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