रायपुर। स्थानीय व्यंजनों का स्वाद चखाने के लिए संस्कृति विभाग द्वारा महंत घासीदास संग्रहालय परिसर में स्थापित गढ़कलेवा के टेंडर में एक बार फिर गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। एक अन्य महिला स्व सहायता समूह सदस्यों ने ये आरोप लगाए हैं।
संस्कृति विभाग के अफसरों पर महिलाओं ने अपने आरोप में कहा है कि पिछले 11 साल से एक ही समूह को टेंडर एलाट किया जा रहा है। इतना ही नहीं सभी दावेदार समूहों के टेंडर जमा होने के बाद इस समूह को काम देने के लिए शर्तें बदल दी जा रही है।

गौरतलब है कि इससे पूर्व भी गढ़ कलेवा के टेंडर में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं। ऐस भी कहा जाता है कि पूर्व में समूह का नाम बदल कर उसी को काम दे दिया गया, मगर यहां गढ़ कलेवा संचालित करने वाले चेहरे वही नजर आते हैं।

पारंपरिक व्यंजनों का गढ़ है गढ़कलेवा
गौरतलब है कि रायपुर में अंबेडकर चौक के पास पिछले कई साल से गढ़कलेवा ब्रांड के रूप में उभरा है, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का लुफ्त उठाने यहां बड़ी तादाद में हर वर्ग के लोग आते हैं। अब देखने वाली बात ये होगी कि शिकायत के बाद टेंडर प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है।
संस्कृति मंत्री का सख्त रुख
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मामले को संज्ञान में लिया है। मंत्री ने निविदा प्रक्रिया निरस्त करने के साथ-साथ पूर्व के कार्यादेशों की उच्चस्तरीय जाँच के निर्देश दिए है। टेंडर रद्द होने की स्थिति में संचालन पर तालाबंदी की संभावना भी जताई जा रही है।


