टीआरपी डेस्क। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में गुरुवार को 52 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़ते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 21 महिलाएं भी शामिल हैं। इनमें से 49 नक्सलियों पर कुल 1.41 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था, जो इस कार्रवाई को और भी अहम बनाता है।

पुलिस के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी, आंध्र-ओडिशा बॉर्डर डिविजन और महाराष्ट्र की भामरागढ़ एरिया कमेटी से जुड़े हुए थे। बीजापुर के पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने बताया कि यह आत्मसमर्पण ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ पहल के तहत वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सीआरपीएफ की मौजूदगी में हुआ।

एसपी यादव ने बताया कि राज्य सरकार की आत्मसमर्पण और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर नक्सलियों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। आत्मसमर्पण करने वालों में डिविजनल कमेटी सदस्य लक्खू कारम उर्फ अनिल और प्लाटून पार्टी कमेटी सदस्य लक्ष्मी माडवी तथा चिन्नी सोढ़ी उर्फ शांति जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं, जिन पर आठ-आठ लाख रुपये का इनाम था। इसके अलावा 13 नक्सलियों पर पांच-पांच लाख, 19 पर दो-दो लाख और 14 नक्सलियों पर एक-एक लाख रुपये का इनाम घोषित था।

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पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को तत्काल 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी और राज्य सरकार की नीति के अनुसार उनके पुनर्वास की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि वे सामान्य जीवन में लौट सकें।

केंद्र सरकार ने 31 मार्च तक देश से नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा है। बीजापुर में हुआ यह सामूहिक आत्मसमर्पण उस दिशा में एक बड़ी कामयाबी के तौर पर देखा जा रहा है।