रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो न केवल लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि विकास और सुरक्षा के प्रति ग्रामीणों के बढ़ते विश्वास की सबसे बड़ी गवाही है। कभी नक्सलियों की तथाकथित राजधानी कहे जाने वाले अबूझमाड़ के कुतुल क्षेत्र में आज आजादी के बाद पहली बार होली के रंग खुले आसमान के नीचे बिखरे। यह महज एक त्योहार का जश्न नहीं, बल्कि वर्षों के डर, दहशत और खूनी सन्नाटे पर शांति और विश्वास की ऐतिहासिक जीत का क्षण है।
बता दें कि अबूझमाड़ का कुतुल वह इलाका है जहां कुछ समय पहले तक शासन-प्रशासन की पहुंच शून्य थी। यहां होली के रंगों का खिलना इस बात का प्रतीक है कि अब बस्तर के घने जंगलों के भीतर भी ‘लाल आतंक’ का साया धुंधला पड़ रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा का इस घटना को सोशल मीडिया पर साझा करना यह दर्शाता है कि सरकार बस्तर के अंतिम छोर तक लोकतंत्र की खुशियां पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस ऐतिहासिक अवसर पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने सोशल मीडिया पर कुतुल में मनाई गई होली की वीडियो साझा करते हुए लिखा कि कभी नक्सलियों की तथाकथित राजधानी कहे जाने वाले अबूझमाड़ के कुतुल क्षेत्र में आज आज़ादी के बाद पहली बार होली के रंग खुले आसमान के नीचे बिखरे। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि वर्षों के डर, दहशत और सन्नाटे पर विश्वास और सुरक्षा की जीत का क्षण है।
सुरक्षा बलों के प्रयासों से बदले इस माहौल में ग्रामीणों और बच्चों ने पहली बार बिना भय के, खुलकर हंसते-गाते होली मनाई। जिन गलियों में कभी सन्नाटा था, वहां आज रंग, उल्लास और उम्मीद की चमक दिखाई दी।
सुरक्षा बलों के अथक प्रयासों और नए कैंपों की स्थापना के बाद बदले इस माहौल में, कुतुल के ग्रामीणों और बच्चों ने पहली बार बिना किसी खौफ के, खुलकर हंसते-गाते होली मनाई। जिन गलियों में कभी शाम ढलते ही मौत सा सन्नाटा पसर जाता था, वहां आज रंगों की फुहार, मांदरी की थाप और नई उम्मीद की चमक साफ दिखाई दी। जवानों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर गुलाल उड़ाया और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।


