टीआरपी डेस्क। ईरान में पिछले 34 दिनों से इंटरनेट सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हैं, जिससे देश की लगभग 9 करोड़ की आबादी का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह कट गया है। इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था नेटब्लॉक्स के अनुसार, ईरान में इंटरनेट एक्सेस सामान्य स्तर के मुकाबले केवल 1 प्रतिशत तक ही सीमित रह गया है। यह स्थिति किसी भी आधुनिक राष्ट्र के लिए गंभीर संकट का संकेत है।

34 दिनों से जारी है पूर्ण ब्लैकआउट

दरअसल, नेटब्लॉक्स के आंकड़ों के मुताबिक यह ब्लैकआउट अपने 34वें दिन में प्रवेश कर चुका है और फिलहाल हालात सामान्य होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। इंटरनेट की उपलब्धता बेहद सीमित होने के कारण आम नागरिक न तो सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर पा रहे हैं और न ही अंतरराष्ट्रीय वेबसाइट्स तक उनकी पहुंच संभव है। इसके चलते पूरा देश वैश्विक स्तर पर डिजिटल रूप से अलग-थलग पड़ गया है।

सैन्य तनाव के बाद बढ़ी सख्ती

बता दें कि यह स्थिति 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान में किए गए हमलों के बाद और अधिक गंभीर हो गई है। माना जा रहा है कि सुरक्षा कारणों और सूचना के प्रवाह को नियंत्रित करने के उद्देश्य से सरकार ने इंटरनेट सेवाओं पर ये सख्त प्रतिबंध लगाए हैं। हालांकि, इन प्रतिबंधों पर आधिकारिक तौर पर अब तक बहुत ही सीमित जानकारी साझा की गई है।

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केवल घरेलू नेटवर्क एनआईएन ही सक्रिय

गौरतलब है कि मौजूदा हालात में ईरान में केवल राष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क (NIN) ही सीमित रूप से काम कर रहा है। इस घरेलू नेटवर्क के जरिए बैंकिंग, सरकारी पोर्टल और कुछ आवश्यक सेवाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन वैश्विक इंटरनेट तक पहुंच पूरी तरह बंद है। सरकार सैटेलाइट आधारित इंटरनेट सेवाओं को भी सीमित करने के लिए उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है, जिससे बाहरी नेटवर्क तक पहुंचना और भी मुश्किल हो गया है।

जनजीवन पर पड़ रहा है गहरा असर

दरअसल, इतने लंबे समय तक इंटरनेट बंद रहने से आम लोगों की दैनिक जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हुई है। व्यापार, ऑनलाइन शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ संचार के तमाम रास्ते बंद हैं। विदेशों में रह रहे रिश्तेदारों से संपर्क करना परिवारों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। जानकारों का मानना है कि इतने लंबे शटडाउन से न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि सूचना के अभाव में पारदर्शिता भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

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