एंग्जायटी और स्ट्रेस से परेशान व्यक्ति मानसिक शांति की तलाश में
मानसिक तनाव और एंग्जायटी के अंतर को समझकर समय पर विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहद जरूरी है।

Health Tips: आज की व्यस्त जीवनशैली और कामकाज के दबाव के कारण मानसिक तनाव और लगातार बेचैनी रहना एक आम समस्या बनती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश लोग सामान्य स्ट्रेस और एंग्जायटी (चिंता विकार) के बीच अंतर को नहीं समझ पाते और इसे एक ही मानकर अनदेखा कर देते हैं। हर समय किसी अज्ञात भय से घिरे रहना, काम में मन न लगना और अकारण घबराहट होना एंग्जायटी के स्पष्ट संकेत हो सकते हैं। यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहे, तो यह दैनिक कार्यप्रणाली के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।

एंग्जायटी केवल विचारों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका सीधा असर शारीरिक अंगों पर भी दिखाई देता है। जब व्यक्ति एंग्जायटी का शिकार होता है, तो हृदय की धड़कन तेज होना, अत्यधिक पसीना आना, सांस फूलना और हाथों में कंपन जैसे लक्षण सामान्य रूप से देखने को मिलते हैं। इसके अलावा, मस्तिष्क और पाचन तंत्र के आपस में जुड़े होने के कारण पेट में ऐंठन, मितली और बार-बार पेट खराब होने जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। हालिया चिकित्सा अध्ययनों में यह तथ्य भी सामने आया है कि शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ने पर भी मानसिक घबराहट और एंग्जायटी के लक्षण तीव्र हो जाते हैं।

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स्ट्रेस और एंग्जायटी के बीच क्या है अंतर?
सामान्य स्ट्रेस और एंग्जायटी के बीच के अंतर को समझना बेहद आवश्यक है। स्ट्रेस आमतौर पर किसी स्पष्ट और तात्कालिक कारण से उत्पन्न होता है, जैसे परीक्षा का दबाव, वित्तीय समस्याएं या ऑफिस की कोई समयसीमा। जैसे ही वह कारण समाप्त होता है, व्यक्ति का तनाव भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसके विपरीत, एंग्जायटी में कोई प्रत्यक्ष कारण न होने पर भी मन में लगातार अनहोनी का डर बना रहता है। व्यक्ति बिना किसी ठोस वजह के भी अत्यधिक असुरक्षित और परेशान महसूस करता है।

क्या कहते है विशेषज्ञ ?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि स्ट्रेस और एंग्जायटी देखने में एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन दोनों की प्रकृति अलग है। स्ट्रेस कारण के खत्म होते ही दूर हो जाता है, जबकि एंग्जायटी में बिना किसी स्पष्ट कारण के मन में लगातार डर बना रहता है। यदि घबराहट और चिंता की यह स्थिति कई हफ्तों या महीनों तक बनी रहे और रोज़मर्रा के काम बाधित होने लगें, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। ऐसे मामलों में समय रहते किसी मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना बहुत ज़रूरी है।

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क्या करें ?
मानसिक तनाव और एंग्जायटी को हल्के में लेना शारीरिक बीमारियों को न्योता देना है। यदि आप या आपके आसपास कोई व्यक्ति लंबे समय से अकारण घबराहट और बेचैनी से जूझ रहा है, तो बिना देर किए विशेषज्ञ की मदद लें। सही समय पर लिया गया मार्गदर्शन व्यक्ति को एक सामान्य और स्वस्थ जीवन की ओर वापस ले जा सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

  • एंग्जायटी और स्ट्रेस में सबसे मुख्य अंतर क्या है?
    स्ट्रेस किसी खास वजह से होता है और वजह खत्म होते ही ठीक हो जाता है, जबकि एंग्जायटी में बिना किसी वजह के भी लगातार डर और बेचैनी बनी रहती है।
  • एंग्जायटी होने पर शरीर में क्या-क्या लक्षण दिखाई देते हैं?
    हृदय की धड़कन तेज होना, हाथों में कंपन, अत्यधिक पसीना आना, सांस फूलना और पेट खराब होना एंग्जायटी के प्रमुख शारीरिक लक्षण हैं।
  • क्या डायबिटीज का एंग्जायटी से कोई संबंध है?
    जी हां, चिकित्सा अनुसंधानों के अनुसार शरीर में ब्लड शुगर लेवल में उतार-चढ़ाव होने से भी घबराहट और एंग्जायटी के लक्षण उभर सकते हैं।
  • एंग्जायटी होने पर डॉक्टर से कब संपर्क करना चाहिए?
    यदि चिंता और घबराहट लगातार कई हफ्तों तक बनी रहे और दैनिक कामकाज या रिश्तों पर असर डालने लगे, तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।
  • पेट की समस्याओं का एंग्जायटी से क्या कनेक्शन है?
    हमारा मस्तिष्क और पाचन तंत्र आपस में जुड़े होते हैं। मानसिक रूप से परेशान या भयभीत होने पर पाचन क्रिया प्रभावित होती है, जिससे पेट खराब या मितली की समस्या होती है।
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