RBI MPC meeting: मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की तीन दिवसीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की महत्वपूर्ण बैठक सोमवार 3 अगस्त से शुरू हो गई है। रिजर्व बैंक के नए गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक पर देश भर के निवेशकों, अर्थशास्त्रियों और आम जनता की पैनी नजरें टिकी हुई हैं। आगामी 5 अगस्त को आने वाले नीतिगत फैसले से यह स्पष्ट होगा कि केंद्रीय बैंक महंगाई नियंत्रण, आर्थिक विकास और भविष्य की ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।
RBI MPC meeting: रेपो रेट में बदलाव की संभावना बेहद कम
वैश्विक स्तर पर जारी आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच इस बैठक से ब्याज दरों, तरलता और अर्थव्यवस्था के भविष्य के संकेत मिलेंगे। रॉयटर्स और ब्लूमबर्ग के सर्वेक्षणों के अनुसार, अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि छह सदस्यीय एमपीसी इस बार भी नीतिगत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रख सकती है। इससे पहले जून में हुई पिछली बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
RBI MPC meeting: महंगाई और जीडीपी के अनुमान
एसबीआई रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो तिमाहियों तक खुदरा महंगाई दर (CPI) 5 प्रतिशत से ऊपर रहने की आशंका है। रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि वित्तीय वर्ष 2027 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में देश की जीडीपी विकास दर 7 प्रतिशत के आंकड़े को पार कर सकती है, जो कि बेहतर आर्थिक गतिविधियों का संकेत है।
इसी के साथ कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रुपये पर बढ़ता दबाव और विदेशी पूंजी प्रवाह में अनिश्चितता को देखते हुए फिलहाल केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती का कोई नरम (Dovish) संकेत मिलने की संभावना कम है।
हालांकि, जुलाई में मजबूत पूंजी प्रवाह दर्ज किया गया है। इसके अलावा, मानसून की बेहतर स्थिति और जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य रहने से बुनियादी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। आर्थिक मामलों के जानकारों के अनुसार ब्याज दरें स्थिर रहने से फिलहाल होम लोन, कार लोन और अन्य ईएमआई (EMI) की दरों में बदलाव की उम्मीद नहीं है।


