Rajpur/ sukmi: छत्तीसगढ़ को राज्य बने ढाई दशक हो चुके मगर आज भी ऐसे अनेक इलाके हैं जो विकास को तरस रहे हैं। अधिसंख्य गांवों तक मूलभूत जरूरतें सड़क, बिजली और पानी की सुविधा नहीं पहुंचाई जा सकी है। आलम यह है कि गांव तक सड़क नहीं होने के चलते मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए जुगत लगानी पड़ती है।

ऐसा ही एक नजारा बलरामपुर जिले में देखने को मिला, जहां एक बीमार महिला को टोकरी नुमा ‘झलगी’ में बिठाकर कांधे पर लेकर काफी दूर तक पैदल सफर तय करना पड़ा।

गांव तक नहीं पहुंच सका एंबुलेंस 

विकास के दावों के बीच बलरामपुर जिले का यह गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से महरूम है। कुसमी जनपद पंचायत के ग्राम भईसापाठ में सड़क न होने के कारण एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, जिसके चलते बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को ‘झलगी‘ का सहारा लेना पड़ा। ग्रामीण इलाकों में सामान इत्यादि ढोने के लिए टोकरी को रस्सी में बांधकर बांस के सहारे कंधे पर उठाया जाता है। ऐसा ही जुगाड़ बनाकर परिजनों ने करीब 2 किलोमीटर तक महिला को कंधे पर उठाकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाया।

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क्या हुआ था?

भईसापाठ निवासी 50 वर्षीय रदनी बाई की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सांस लेने में दिक्कत और कमजोरी के कारण उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी था। परिजनों ने 108 एंबुलेंस को फोन किया, लेकिन कच्चा और कीचड़ भरा रास्ता होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका।

समय न गवाते हुए गांव के युवाओं ने पेड़ की डालियों और साड़ी से झलगी बनाई। फिर दो लोग बारी-बारी से महिला को उठाकर लगभग 2 किलोमीटर दूर पक्की सड़क तक ले गए। वहां से उन्हें एंबुलेंस के जरिए कुसमी अस्पताल भेजा गया।

कब तक चलेगी ये मजबूरी: ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि भईसापाठ समेत आसपास के 3-4 गांवों को जोड़ने वाली कोई पक्की सड़क नहीं है। बरसात में स्थिति और खराब हो जाती है। 

“गर्भवती महिला, बुजुर्ग या कोई गंभीर मरीज हो तो उसे जान जोखिम में डालकर ले जाना पड़ता है। कई बार इलाज में देरी से दिक्कतें बढ़ जाती हैं,” ग्रामीणों ने बताया।

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लोगों ने कलेक्टर और स्थानीय विधायक से तुरंत सड़क निर्माण और गांव तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने की मांग की है।

FAQ – गांव तक सड़क नहीं होने से परेशानी 

सवाल: बलरामपुर के किस गांव में यह घटना हुई?

यह घटना बलरामपुर जिले के कुसमी ब्लॉक के ग्राम भईसापाठ में हुई।

सवाल: बीमार महिला को अस्पताल कैसे पहुंचाया गया?

सड़क न होने के कारण ग्रामीणों ने झलगी बनाकर 50 वर्षीय रदनी बाई को 2 किलोमीटर तक कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया।

सवाल: एंबुलेंस क्यों नहीं पहुंच सकी?

गांव तक पक्की सड़क और सुगम रास्ता नहीं होने के कारण 108 एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई।

सवाल: ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?

ग्रामीणों ने गांव तक पक्की सड़क बनाने और आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।

सवाल: ऐसी समस्या से कौन से लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं?

गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और गंभीर बीमारी वाले मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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