टीआरपी डेस्क। हर वर्ष 8 मई को वर्ल्ड रेड क्रॉस डे मनाया जाता है। रेड क्रॉस एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसका मिशन मानवीय जिन्दगी व सेहत को बचने के लिए है। इसे अंतरराष्ट्रीय स्वयं सेवक के रूप में मनाया जाता है। इसकी शुरुआत इंटरनेशनल कमिशन ने की थी। रेड क्रॉस के सिद्धांतों को मान्यता 15वें इंटरनेशनल कांफ्रेंस में वर्ष 1934 में मिली, जिसके बाद इसे दुनियाभर में लागू किया गया।

रेड क्रॉस सोसाइटी का मुख्य उद्देश्य युद्ध या विपदा के समय होने वाली परेशानियों से राहत दिलाना है। युद्ध के दौरान घायल सैनिकों की मदद करना और उनका इलाज करना इसके प्रमुख उद्देश्यों में रहा है, जबकि यह संस्था ब्लड बैंक से लेकर विभिन्न तरह की स्वास्थ्य और समाजसेवाओं में अपनी भूमिका निभा रही है। मानव सेवा को मूल कार्य मानने वाली यह संस्था महामारी जैसी आपदा में भी पीड़ितों की सहायता करती है। सफेद पट्टी पर लाल रंग का क्रॉस का चिह्न इस संस्था का निशान है, जिसका गलत इस्तेमाल करने पर जुर्माना लगाए जाने का प्रावधान है। यहां तक कि दोषी व्यक्ति की संपत्ति भी ज़ब्त की जा सकती है।

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भारत में इसकी स्थापना

दुनिया के लगभग 210 देश इस संस्था से जुड़े हुए हैं। भारत में रेड क्रॉस सोसाइटी की स्थापना साल 1920 में पार्लियामेंट्री एक्ट के अनुसार की गई। भारत में रेडक्रॉस सोसाइटी की 700 से भी अधिक शाखाएं हैं। रेड क्रॉस सोसाइटी के सिद्धांतों को मान्यता साल 1934 में 15वें अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में मिली, जिसके बाद इसे दुनियाभर में लागू किया गया।

कोरोना महामारी काल में रेड क्रॉस की भूमिका

-हजारों तरह की राहत सामग्री के साथ क्वारंटीन सेंटर सेवा करता है।
-भोजन उपलब्ध कराना और लोगों को परिवार से मिलाना है।
-शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराना है।
-ब्लड बैंकों के जरिए खून की कमी दूर करना है।
-इस सोसाइटी के लाखों स्वयंसेवी इस महामारी के दौर में समाजसेवा में लगे हैं।

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