सुप्रीम कोर्ट

SC on Sedition Law: देशद्रोह कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में स्थगित कर दी गई। दरअसल केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि वो दंडात्मक प्रावधान आईपीसी की धारा 124ए की समीक्षा के अंतिम चरण में है।

केंद्र का पक्ष रखते हुए वेंकटरमणि ने कहा कि परामर्श प्रक्रिया अग्रिम चरण में है और इसके संसद में जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट को दिखाया जाएगा। उन्होंने पीठ से आगे आग्रह किया कि कृपया मामले को संसद के मानसून सत्र के बाद आगे की सुनवाई के लिए पोस्ट किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला की पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी की दलील पर गौर किया कि सरकार ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 124ए की फिर से जांच करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब इस मामले में अगस्त माह में सुनवाई की जाएगी।

बता दें कि पिछले साल 11 मई को एक ऐतिहासिक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने देशद्रोह के इस दंडात्मक कानून को तब तक के लिए रोक दिया था जब तक कि एक उचित सरकारी पैनल इसकी फिर से जांच नहीं करता। अदालत ने इसी के साथ केंद्र और राज्यों को तब तक देशद्रोह का कोई भी नया मामला दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया। 

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जानें क्या है देशद्रोह कानून

देशद्रोह कानून के अनुसार, सरकार के प्रति असंतोष पैदा वाले व्यक्ति को आईपीसी की धारा 124ए के तहत 3 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। यह कानून स्वतंत्रता से 57 साल पहले और आईपीसी के अस्तित्व में आने के लगभग 30 साल बाद 1890 में दंड संहिता में लाया गया था। 

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