टीआरपी डेस्क। भारत-पाकिस्तान विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर एनसीईआरटी ने स्कूलों के लिए नया शैक्षिक मॉड्यूल जारी किया है। इसमें 1947 के बंटवारे की ज़िम्मेदारी तीन पक्षों मुहम्मद अली जिन्ना, कांग्रेस और लॉर्ड माउंटबेटन पर डाली गई है।

विभाजन के तीन चेहरे

मॉड्यूल में कहा गया है कि विभाजन किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं था।

  • जिन्ना ने पाकिस्तान की मांग रखी।
  • कांग्रेस ने परिस्थितियों के चलते इसे मान लिया।
  • और माउंटबेटन ने इसे लागू किया।

मॉड्यूल के मुताबिक, भारत का बंटवारा 15 अगस्त 1947 को हुआ, लेकिन इसके घाव आज तक महसूस किए जाते हैं। इसमें लिखा है कि माउंटबेटन की जल्दबाजी आजादी की तारीख जून 1948 से घटाकर अगस्त 1947 करना और सिरिल रैडक्लिफ को सीमांकन के लिए केवल पांच हफ्ते देना हिंसा और उथल-पुथल की बड़ी वजह बनी।

जिन्ना और कांग्रेस का दृष्टिकोण

1940 के लाहौर प्रस्ताव का जिक्र करते हुए मॉड्यूल कहता है कि जिन्ना ने हिंदू और मुसलमानों को दो अलग सभ्यताएं बताया, जो पाकिस्तान की नींव बना। कांग्रेस नेताओं पर लिखा गया है…

  • सरदार पटेल ने गृहयुद्ध से बचने के लिए विभाजन स्वीकार किया।
  • महात्मा गांधी विरोध में रहे, लेकिन कांग्रेस को रोक भी नहीं पाए।
  • नेहरू और पटेल ने अंततः विभाजन का विचार मान लिया।
  • 14 जून 1947 को गांधी ने कांग्रेस कार्य समिति को भी इसके लिए तैयार कर लिया।
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विभाजन का असर

मॉड्यूल में कहा गया है कि विभाजन से कश्मीर विवाद पैदा हुआ, जिसे विदेशी ताकतें भारत पर दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल करती रही हैं। इसे कक्षा 6 से 12 तक के लिए पूरक सामग्री के रूप में जोड़ा जाएगा।

राजनीतिक प्रतिक्रिया

कांग्रेस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। पवन खेड़ा ने कहा कि मोदी सरकार लगातार इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी तंज कसते हुए कहा कि अगर इतिहास के पन्ने पलटे जाएं तो यह साफ दिखेगा कि किसने माफी मांगी थी।