छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह की दीदियों ने बनाई खास बीज राखियां
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बिहान योजना के तहत स्व-सहायता समूह की दीदियों ने बनाई खास बीज राखियां

Rakshabandhan 2026: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में रक्षाबंधन के पावन पर्व पर पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल शुरू की गई है, जहाँ स्व-सहायता समूह की दीदियों ने देसी बीजों से आकर्षक और इको-फ्रेंडली राखियां तैयार की हैं। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन और बिहान योजना के तहत इस रचनात्मक अभियान को जिलेभर में बढ़ावा दिया जा रहा है।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश

यह खबर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण जागरूकता का एक बेहतरीन उदाहरण प्रस्तुत करती है। पारंपरिक राखियों के विपरीत, ये बीज राखियां त्योहार के बाद कचरा बनने के बजाय प्रकृति को हरा-भरा बनाने में मददगार साबित होंगी, जिससे स्थानीय स्व-सहायता समूहों की आय भी बढ़ेगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दूर-दूर तक पहुंचेगा।

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में बिहान योजना के तहत महिलाएं इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं। इन राखियों को धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों से बेहद सुंदर ढंग से बनाया जा रहा है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में कृष्णा स्व-सहायता समूह की महिला कविता राठिया सहित बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर, संबलपुरी, लैलूंगा, और तमनार के लिबरा गांव की जननी समूह की महिलाओं ने शानदार राखियां तैयार की हैं।

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सर्वश्रेष्ठ बीज राखी प्रतियोगिता

इस अनूठी पहल के तहत जिले के सभी सातों विकासखंडों में प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है, जिसके तहत 20 जुलाई को हर ब्लॉक से एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। प्रतियोगिता में विजयी रहने वाली सातों विकासखंडों की दीदियों को 27 जुलाई को एक विशेष समारोह में सम्मानित किया जाएगा, जहाँ वे कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष अधिकारियों को अपने हाथों से बनी बीज राखियां बांधेंगी।

बीज से बनाई जाने वाली राखियों की विशेषता

  • रायगढ़ जिले के सभी 7 विकासखंडों में बिहान योजना के तहत बीज राखियों का निर्माण किया जा रहा है।
  • राखियों के चयन के लिए प्रतियोगिता 20 जुलाई को आयोजित की जा रही है।
  • विजेता दीदियों को सम्मानित करने और अधिकारियों को राखी बांधने का कार्यक्रम 27 जुलाई को तय किया गया है।

बिहान की दीदियों द्वारा शुरू किया गया यह अभियान अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है, जो आने वाले समय में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति एक नई दिशा देगा।

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