महासमुंद बाल सुधार गृह से 8 नाबालिग फरार
महासमुंद के बरोंड़ा बाजार स्थित बाल संप्रेक्षण गृह की सुरक्षा दीवार और खिड़की, कटीले तार काटकर 8 बाल अपचारी फरार हो गए।

CG News: छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सोमवार, 3 अगस्त 2026 को तड़के करीब साढ़े 3 बजे बरोंड़ा बाजार स्थित शासकीय बाल संप्रेक्षण गृह से 8 नाबालिग खिड़की की ग्रिल तोड़कर और 12 फीट ऊंची सुरक्षा दीवार पर लगे कटीले तार काटकर फरार हो गए। सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई इस गंभीर घटना के बाद पुलिस प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग में हड़कंप मच गया है। फरार हुए अपचारियों में दुष्कर्म, चोरी, आबकारी और एनडीपीएस एक्ट के संगीन मामलों में निरूद्ध आरोपी शामिल हैं। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है तथा सीमावर्ती इलाकों में नाकेबंदी कर व्यापक सर्च अभियान चलाया जा रहा है।

महासमुंद जिला मुख्यालय के समीप बरोंड़ा बाजार में संचालित इस बाल संप्रेक्षण गृह में कुल 27 बाल अपचारियों को रखा गया था। सोमवार सुबह जब सुरक्षाकर्मी और स्टाफ कमरे की ओर गए तो उन्हें खिड़की की लोहे की ग्रिल टूटी हुई मिली। परिसर का मुआयना करने पर पता चला कि नाबालिगों ने अत्यंत योजनाबद्ध तरीके से परिसर की 12 फीट ऊंची पक्की दीवार पर लगे लोहे के कटीले तारों को काटा और वहां से कूदकर फरार हो गए। भागे हुए 8 नाबालिगों में से 6 छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार, सरायपाली, महासमुंद, फिंगेश्वर और कुरूद क्षेत्र के रहने वाले हैं, जबकि 2 नाबालिग पड़ोसी राज्य ओडिशा के कालाहांडी जिले के निवासी बताए जा रहे हैं। ये सभी पिछले 4 से 5 महीनों से विभिन्न आपराधिक मामलों में यहां बंद थे।

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राज्य के बाल संप्रेक्षण गृहों में बार-बार सुरक्षा में चूक
छत्तीसगढ़ के बाल सुधार गृहों से नाबालिगों के भागने और सुरक्षा में सेंधमारी की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले सरगुजा के बाल सुधार गृह से 3 नाबालिग फरार हो चुके हैं, जबकि 24 जून को 11 बच्चे खिड़की तोड़कर भाग निकले थे। इसके बाद 14 जुलाई की रात पुराने दरवाजे को तोड़कर 13 बच्चे फिर फरार हो गए थे। सबसे वीभत्स घटना 13 जुलाई को बिलासपुर जिले में देखने को मिली थी, जहां चार बाल अपचारियों ने चौकीदार के साथ बेरहमी से मारपीट की, उसके हाथ-पैर बांधकर गला दबा दिया और हत्या करने के बाद फरार हो गए। महासमुंद के इसी बरोंड़ा बाजार स्थित केंद्र में 2 साल पहले भी ऐसी ही घटना हुई थी, जिसके बाद दीवार को 4 फीट ऊंचा कर ऊपर कटीले तार लगाए गए थे, लेकिन सुरक्षा के तमाम दावे फिर खोखले साबित हुए।

तलाश में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही सिटी कोतवाली पुलिस और महिला व बाल विकास विभाग की टीम ने संप्रेक्षण गृह पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, फरार नाबालिगों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों का गठन कर दिया गया है और बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन तथा संभावित ठिकानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। जांच अधिकारी इस बिंदु पर भी गहनता से पड़ताल कर रहे हैं कि यह घटना केवल ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों की लापरवाही का परिणाम है या इसके पीछे किसी अंदरूनी मिलीभगत अथवा बाहर से मिली मदद का हाथ है। पुलिस का कहना है कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
बाल संप्रेक्षण गृहों से संगीन अपराधों में शामिल नाबालिगों के बार-बार फरार होने से आम जनता में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। नशे की तस्करी, चोरी और गंभीर अपराधों में लिप्त अपचारियों के खुले में घूमने से सीमावर्ती इलाकों और स्थानीय बस्तियों में अपराध का खतरा बढ़ जाता है। इस घटना ने एक बार फिर राज्य के सुधार गृहों की सुरक्षा संरचना, सीसीटीवी कैमरों की स्थिति, पर्याप्त सुरक्षा बलों की तैनाती और सुधारत्मक माहौल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन को अब केवल दीवारों की ऊंचाई बढ़ाने के बजाय आधुनिक निगरानी तंत्र और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने पर ध्यान देना होगा।