टीआरपी। Condolence meet : विगत दिनों छत्तीसगढ़ के नामचीन कवि, उपन्यासकार विनोद कुमार शुक्ल, कवि नासिर अहमद सिकंदर एवं शायर रजा हैदरी का निधन हो गया। दिवंगत रचनाकारों को आदराजंलि दी गई। प्रगतिशील लेखक संघ, जनवादी लेखक संघ एवं जन संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में तीनों प्रिय रचनाकारों की स्मृति में आयोजित आदराजंलि कार्यक्रम में याद किया गया।

प्रगतिशील लेखक संघ रायपुर के अध्यक्ष अरुणकांत शुक्ला ने विनोद कुमार शुक्ल को मनुष्यता का पक्षधर रचनाकार बताया जबकि कवि नासिर अहमद सिकन्दर ताउम्र प्रदेश के चेतनाशील रचनाकारों को एकजुट करने में जुटे रहे। शायर रज़ा हैदरी आवाम के सुख-दुख से जुड़े रचनाकार थे.। उनकी शायरी भी हमारे दिलों में ज़िंदा रहेगी।

जनवादी लेखक संघ के प्रदेश अध्यक्ष परदेशी राम ने विनोद कुमार शुक्ल को अनूठे शिल्प का रचनाकार बताया। उन्होंने कवि नासिर को संगठन के लिए जी-जान से जुटे रहने वाला संगठनकर्ता बताते हुए कहा कि वे ताजिंदगी सांप्रदायिकता के खिलाफ मुखर रहे.

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जन संस्कृति मंच के राष्ट्रीय सचिव राजकुमार सोनी ने कहा कि स्व.शुक्ल इसलिए भी बड़े रचनाकार थे क्योंकि वे संवेदनशील होने के साथ-साथ ईमानदार थे। जबकि नासिर अहमद सिकन्दर इसलिए भी सबसे अलग थे क्योंकि वे कविता के सशक्त हस्ताक्षरों को चिन्हांकित कर रहे थे। शायर रज़ा हैदरी हिंदी और उर्दू के बीच एक सेतु का काम कर रहे थे।

शायर मीर अली मीर ने तीनों साहित्यकारों को खुशबू की उपमा देते हुए कहा कि वे अपने जाने के बाद भी प्रदेश की मिट्टी में खाद बन कर अच्छे रचनाकारों को प्रोत्साहित करते रहेंगे।

शायर सुखनवर हुसैन सुखनवर ने अपनी नज़्मों और ग़ज़लों से छत्तीसगढ़ के उर्दू साहित्य में विशिष्ट पहचान बनाने वाले रायपुर में मरकज़ ए अदम के संस्थापक, आजीवन अध्यक्ष और श्लोक पत्रिका के संपादक प्रकाशक रज़ा हैदरी साहब के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

जलेस की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. नंदन ने विनोद कुमार शुक्ल के साथ अपने संबंधों का जिक्र किया और जनवादी साथी नासिर अहमद सिकंदर से नागार्जुन के साहित्य पर रिसर्च के दौरान उत्पन्न निकटता को बताया। प्रलेस के नंद कुमार कंसारी ने मनुष्यता को बचाने के लिए लिए लेखन करने में जुटे स्व.विनोद से हर बार की मुलाकात को अदभुत मुलाकात बताया।

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कवि आलोक वर्मा ने विनोद के संपूर्ण साहित्य को पढ़ कर ही उनके बारे में कोई राय बनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि शुक्ल को बेहतर ढंग से समझने के लिए ‘लगभग जय हिंद’ से लेकर उनके बाल साहित्य को पढ़े जाने का पक्ष लिया। विविध भारती के उद्घोषक रहे कमल शर्मा ने विनोद शुक्ल से जुड़े अपने अनुभवों का जिक्र किया। वरिष्ठ पत्रकार आफताब बेगम ने भी विनोद शुक्ल तथा नासिर अहमद सिकंदर के रचनात्मक योगदान का जिक्र किय।. संचालन कर रहे जलेस के राज्य महासचिव पीसी रथ ने दिवंगत विभूतियों के निष्काम योगदान और उनके सृजन की ईमानदारी का जिक्र किया।

सभा को संस्कृति कर्मी निसार अली, मिनहाज असद, फ़ज़ले अब्बास सैफी, सनियारा ख़ान ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में पत्रकार, कवि समीर दीवान रूमा सेनगुप्ता, रेणु नंदी, सैयद सलमा, सुधा बाघ, आफताब बेगम, मो शमीम, डॉ बिप्लब वंद्योपाध्याय, अजीज साधीर, इंद्र राठौर, हरीश कोटक एवं अन्य कई रचनाकार, संस्कृति कर्मी शामिल थे। जलेस की ओर से शायर शिज्जू शकूर ने आभार व्यक्त किया।

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