टीआरपी। municipal corporation : नगर निगम की अहम जिम्मेदारी शहर को साफ-सुथरा रखना और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति करना है, ताकि शहरवासी स्वस्थ रहें और बीमारियों को फैलने से रोका जा सके। साथ ही नागरिकों को आवारा जानवरों से सुरक्षित रखने का उपाय करने की भी जिम्मेदारी है। अब, इन जिम्मेदारियों को पूरा करने में नगर निगम कहां तक सफल हो रहा है, यह सोचनीय है। आम जनता को पीने का स्वच्छ पानी भी कई मोहल्लों में मुहैया नहीं हो पा रहा है और नालियां गंदगी से बजबजा रही है। कहीं बड़े बड़े नाले खुले पड़े हैं तो कहीं गंदगी का अंबार लगा है।

ऐसी ही समस्याओं के बीच मंगलवार को नगर निगम की दो नीतियां सामने आईं। एक ओर निगम कर्मचारियों ने मानवता दिखाते हुए नाले में गिरे सांड को जेसीबी के जरिये निकालकर उसकी जान बचाई। वहीं, दूसरी ओर गली-गली में घूमने वाले श्वानों को बेदर्दी से पकड़कर ले गए।

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सांड को सुरक्षित निकालने पर जहां कुछ लोग नगर निगम कर्मचारियों की तारीफें करते रहें, वहीं कुछ पशु प्रेमी श्वानों को बेदर्दी से पकड़कर ले जाने पर नगर निगम कर्मियों को कोसने से भी नहीं चूके। लोगों का कहना था कि यदि श्वानों से आम लोगों को परेशानी हो रही है तो उन श्वानों को पकड़ा जाए लेकिन जहां भी श्वानों को ले जाया जा रहा है, वहां उनके खाने, रहने की व्यवस्था की जाए। श्वानों को बेरहमी से न मारा जाए। नगर निगम को इसके लिए फंड की व्यवस्था करनी चाहिए।

सांड की जान बचाई

गौरतलब है कि जीई मार्ग अनुपम गार्डन के पास पुरानी नेकी की दीवार के समीप नाले में गिरे सांड को निगम जोन 7 स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जेसीबी की सहायता से नाले से सुरक्षित बाहर निकाला।

श्वानों को पकड़ा

दूसरी ओर चंद्रशेखर आजाद वार्ड क्षेत्र में आवारा श्वानों को पकड़ने का अभियान चलाया गया। यह अभियान एनिमल बर्थ कण्ट्रोल (एबीसी) कार्यक्रम के तहत किया गया। निगम अधिकारियों का कहना है कि प्रतिदिन औसतन 15-20 आवारा श्वानों को पकडकर टीकाकरण, नसबंदी (डिवार्मिंग / स्टेरिलाईजेशन) किया जा रहा है। उक्त कार्रवाई उच्चतम न्यायालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है।

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श्वानों को निर्धारित स्थान पर भोजन

नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि राजधानी के सभी वार्डों में श्वानों के लिए फीडिंग स्थल चिह्नांकित किया है। निर्धारित स्थानों पर ही भोजन व्यवस्था सुनिश्चित कराने का प्रयास किया जा रहा है ताकि श्वानों को भोजन वितरण से उत्पन्न होने वाली समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।