रायपुर। छत्तीसगढ़ कांग्रेस में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे के बयान के बाद पार्टी में नाराज़गी का दौर शुरू हो गया है, जो अब संगठनात्मक कार्रवाई तक पहुंच चुका है। बुधवार को हुई प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में चौबे के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया। बैठक में शामिल सभी पदाधिकारियों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया।

इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज और नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत मौजूद थे। उन्होंने प्रदेश के सभी जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्षों से फीडबैक लिया और अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही।

क्या था बयान?
पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के जन्मदिन के अवसर पर कहा था कि “जनता चाहती है कि कांग्रेस का नेतृत्व भूपेश बघेल करें। आने वाले समय में भी वही नेतृत्व करें। भाजपा के कुशासन और मोदी की गारंटी के खिलाफ लड़ाई सिर्फ भूपेश बघेल ही लड़ सकते हैं।” इस बयान ने पार्टी के भीतर हलचल मचा दी। इसे प्रदेश नेतृत्व और आलाकमान की नीति के खिलाफ माना गया। हालांकि विवाद बढ़ने पर चौबे ने यू-टर्न लिया। सूत्रों के अनुसार, सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होने के बाद रविंद्र चौबे पर संगठन कोई ठोस कदम उठा सकता है।

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“वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान में तेजी
इस पूरी हलचल के बीच कांग्रेस ने अपने “वोट चोर गद्दी छोड़” अभियान को और तेज करने की रणनीति पर भी मंथन किया। संगठन चाहता है कि कार्यकर्ता ज़मीनी स्तर पर भाजपा के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाएं, लेकिन आंतरिक अनुशासन के साथ।